फॉकलैंड द्वीपसमूह
पाठ्यक्रम: GS1/भूगोल; GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- 2026 फीफा विश्व कप के सेमीफाइनल में इंग्लैंड को पराजित करने के बाद अर्जेंटीना की टीम द्वारा फॉकलैंड द्वीपसमूह को अर्जेंटीना का क्षेत्र दर्शाने वाला बैनर प्रदर्शित किए जाने से विवाद उत्पन्न हो गया।
परिचय
- इस बैनर ने अर्जेंटीना और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के मध्य लगभग 200 वर्ष पुराने संप्रभुता विवाद को पुनः चर्चा में ला दिया।
- फॉकलैंड द्वीपसमूह, जिसे अर्जेंटीना में इस्लास माल्विनास कहा जाता है, वर्ष 1833 में ब्रिटेन द्वारा पुनः नियंत्रण स्थापित किए जाने के बाद से विवादित बना हुआ है।
- अर्जेंटीना का दावा है कि वर्ष 1816 में स्पेन से स्वतंत्रता प्राप्त करने के पश्चात उसने इन द्वीपों पर स्पेन की संप्रभुता उत्तराधिकार के रूप में प्राप्त की थी। अतः वह इन द्वीपों पर ब्रिटेन के नियन्त्रण को अवैध मानता है।
- वर्ष 1982 में दोनों देशों के बीच 74 दिनों तक युद्ध हुआ, जिसमें 649 अर्जेंटीनी तथा 255 ब्रिटिश सैनिकों की मृत्यु हुई।
- वर्ष 2013 में आयोजित जनमत-संग्रह में द्वीपसमूह के अधिकांश निवासियों ने ब्रिटिश विदेशी क्षेत्र के रूप में बने रहने के पक्ष में मतदान किया, किंतु अर्जेंटीना इस परिणाम को मान्यता नहीं देता।

स्रोत: IE
मानसबल झील
पाठ्यक्रम: GS1/समाचारों में स्थान
संदर्भ
- प्रवासी पक्षियों की पुनः वापसी के साथ मानसबल झील पारिस्थितिकीय पुनरुद्धार की दिशा में अग्रसर है।
परिचय
- यह मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में स्थित भारत की सबसे गहरी स्वच्छ जल की झील है।
- माना जाता है कि मानसबल नाम की उत्पत्ति मानसरोवर झील के नाम से हुई है।
- झील के किनारे स्थित जरोका नामक मुगल उद्यान, जिसका निर्माण नूरजहाँ ने करवाया था, झील का मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है।
- मानसबल झील 23 कुलों से संबंधित 46 से अधिक पक्षी प्रजातियों का प्राकृतिक आवास रही है, जिनमें प्रमुख हैं—
- मल्लार्ड
- व्हाइट-हेडेड डक
- यूरेशियन हूपो
- यूरेशियन कॉलर्ड डव
- लेसर पाइड किंगफिशर
- गोल्डन ईगल
- ग्रे-बैक्ड श्राइक
- टिकेल्स थ्रश आदि।
- इसे उष्ण मोनोमिक्टिक झील के रूप में वर्गीकृत किया गया है, अर्थात् यह वर्ष में केवल एक बार अल्प अवधि के लिए जल का पूर्ण मिश्रण करती है।
- उष्ण मोनोमिक्टिक झील वह जलाशय होता है जो कभी जमता नहीं है तथा वर्ष के अधिकांश समय तापीय स्तरीकरण की अवस्था में रहता है।
- झील का जल एक निकास नहर के माध्यम से झेलम नदी से जुड़ा हुआ है तथा इसके जल प्रवाह को कृत्रिम रूप से नियंत्रित किया जाता है।
स्रोत: TH
विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग संगठन (WAICO)
पाठ्यक्रम: GS2/शासन
समाचारों में
- चीन ने 2026 विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन के दौरान शंघाई में औपचारिक रूप से विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग संगठन (WAICO) का शुभारंभ किया।
WAICO के बारे में
- यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सहयोग, क्षमता निर्माण तथा साझा AI शासन मानकों को बढ़ावा देने हेतु विकासशील देशों के लिए स्थापित एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसका स्थायी मुख्यालय शंघाई में स्थित है।
- यह वैश्विक दक्षिण पर विशेष रूप से केंद्रित अपनी प्रकार की प्रथम स्थायी संस्था है।
- वर्तमान में इसमें 29 देशों के प्रतिनिधि सम्मिलित हैं।
- चीन ने 5,000 AI प्रशिक्षण अवसर उपलब्ध कराने तथा आसियान , अफ्रीकी संघ , ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (SCO), अरब राज्यों के लीग तथा CELAC के साथ संयुक्त AI सहयोग केंद्र स्थापित करने की घोषणा की है।
- संगठन ओपन-सोर्स AI मॉडल, प्रौद्योगिकी साझाकरण तथा सहयोगात्मक AI विकास को प्रोत्साहित करेगा।
- WAICO की रूपरेखा से जुड़ने वाले देशों के लिए यूरोपीय संघ AI अधिनियम , OECD AI सिद्धांत अथवा G7 हिरोशिमा प्रक्रिया के अनुरूप AI विनियम अपनाना अनिवार्य नहीं होगा।
महत्व
- यह मंच वैश्विक दक्षिण के साथ वैश्विक AI शासन में चीन के प्रभाव को अधिक सुदृढ़ करेगा।
- यह पश्चिम-नेतृत्व वाले AI शासन ढाँचों—जैसे OECD, EU AI Act तथा G7हिरोशिमा प्रक्रिया—के समक्ष पहला वास्तविक संस्थागत विकल्प है, जिसे विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के देशों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
स्रोत: इंडिया टुडे
निवेश अनुकूलता सूचकांक (IFI)
पाठ्यक्रम: GS2/शासन
संदर्भ
- नीति आयोग ने “निवेश अनुकूलता सूचकांक (IFI)” शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है।
परिचय
- यह रिपोर्ट इस बात का संरचित एवं आँकड़ा-आधारित ढाँचा प्रस्तुत करती है कि राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश निवेश के लिए अनुकूल वातावरण का सृजन, संवर्धन एवं स्थायित्व सुनिश्चित करने में कितने प्रभावी हैं।
- इसमें निवेश आकर्षण का मूल्यांकन निम्नलिखित आठ स्तंभों के आधार पर किया गया है—
- अवसंरचना
- व्यावसायिक वातावरण
- संसाधन
- सरकारी नीति
- नियामकीय सुगमता
- संस्थागत वातावरण
- वित्तीय स्वास्थ्य
- पर्यावरणीय प्रत्यास्थता
- इस रूपरेखा में 84 संकेतकों को सम्मिलित किया गया है, जिनमें द्वितीयक आँकड़ों के साथ-साथ निवेशकों के प्राथमिक सर्वेक्षण से प्राप्त धारणा-आधारित मापदंड भी शामिल हैं।
राज्यों का वर्गीकरण
- राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को उनके प्रदर्शन के आधार पर निम्नलिखित चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है—
- शीर्ष प्रदर्शनकर्ता — 50 से अधिक अंक।
- अग्रणी राज्य — 45 से 50 अंक।
- उभरते प्रदर्शनकर्ता — 40 या उससे अधिक, किंतु 45 से कम अंक।
- आकांक्षी राज्य — 40 से कम अंक।
प्रमुख निष्कर्ष
- बड़े राज्यों की श्रेणी में गुजरात प्रथम स्थान पर रहा, जबकि महाराष्ट्र एवं तमिलनाडु क्रमशः दूसरे एवं तीसरे स्थान पर रहे। यही तीनों राज्य समग्र सूचकांक में भी शीर्ष प्रदर्शनकर्ता हैं।
- पर्वतीय एवं उत्तर-पूर्वी राज्यों की श्रेणी में उत्तराखंड प्रथम स्थान पर रहा, जिसके बाद असम तथा हिमाचल प्रदेश का स्थान रहा।
- नगर-राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की श्रेणी में गोवा प्रथम स्थान पर रहा, जबकि दिल्ली एवं चंडीगढ़ क्रमशः दूसरे एवं तीसरे स्थान पर रहे।
स्रोत: TH
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM)
पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था
संदर्भ
- केंद्र सरकार ने हरजीत सिंह ग्रेवाल को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) का अध्यक्ष नियुक्त किया है।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM)
- केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के अंतर्गत राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) की स्थापना की।
- प्रथम वैधानिक राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का गठन वर्ष 1993 में किया गया।
- प्रारंभ में केंद्र सरकार द्वारा पाँच धार्मिक समुदायों—मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध एवं पारसी (जरथुस्त्री)—को अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में अधिसूचित किया गया था।
- वर्ष 2014 में जैन समुदाय को भी अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में अधिसूचित किया गया।
- संरचना: राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 की धारा 3(2) के अनुसार आयोग में निम्नलिखित सदस्य होते हैं—
- एक अध्यक्ष
- एक उपाध्यक्ष
- पाँच सदस्य
- इस प्रकार आयोग में कुल सात सदस्य होते हैं, जिन्हें केंद्र सरकार प्रतिष्ठा, क्षमता एवं सत्यनिष्ठा वाले व्यक्तियों में से नामित करती है।
- प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष का होता है।
- उद्देश्य: आयोग का उद्देश्य भारतीय संविधान तथा संसद एवं राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए कानूनों में निहित प्रावधानों के अनुरूप अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा एवं संरक्षण सुनिश्चित करना है।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के कार्य
- केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा अल्पसंख्यकों के हितों की सुरक्षा हेतु उपलब्ध संवैधानिक एवं विधिक संरक्षणों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अनुशंसाएँ करना।
- अल्पसंख्यकों के अधिकारों एवं संरक्षणों से वंचित किए जाने संबंधी विशिष्ट शिकायतों की जाँच करना तथा संबंधित प्राधिकारियों के समक्ष ऐसे मामलों को उठाना।
- अल्पसंख्यकों के विरुद्ध होने वाले भेदभाव से उत्पन्न समस्याओं का अध्ययन कराना तथा उनके समाधान हेतु आवश्यक उपायों की अनुशंसा करना।
- अल्पसंख्यकों से संबंधित विषयों एवं उनके समक्ष उपस्थित कठिनाइयों पर समय-समय पर अथवा विशेष प्रतिवेदन केंद्र सरकार को प्रस्तुत करना।
स्रोत:TH
ICMR i-ड्रोन पहल
पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य
समाचारों में
- हाल ही में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने अपनी i-DRONE पहल के अंतर्गत दूरस्थ क्षेत्रों में क्षयरोग (TB) के थूक (Sputum) नमूनों के ड्रोन-सहायता प्राप्त परिवहन का सफल प्रदर्शन किया, जिससे तपेदिक के निदान तक पहुँच को बेहतर बनाने में सफलता मिली है।
i-DRONE पहल
- ICMR की ड्रोन रिस्पॉन्स एंड आउटरीच फॉर नॉर्थ ईस्ट (i-DRONE) पहल का शुभारंभ वर्ष 2021 में किया गया था।
- इसका उद्देश्य मणिपुर एवं नागालैंड के दूरस्थ क्षेत्रों में टीकों एवं अन्य चिकित्सीय सामग्रियों की आपूर्ति हेतु ड्रोन के उपयोग का मूल्यांकन करना था।
- इस परियोजना के अंतर्गत तेलंगाना में हब एवं स्पोक आधारित ड्रोन नेटवर्क विकसित किया गया, जिसने—
- 60 उप-स्वास्थ्य केंद्रों ,
- 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs),
- तथा 4 तपेदिक (TB) इकाइयों को आपस में जोड़कर TB निदान के लिए थूक के नमूनों के परिवहन की व्यवस्था सुनिश्चित की।
प्रमुख परिणाम
- तपेदिक के निदान में लगने वाला माध्य समय 15 दिनों से घटकर 5 दिन रह गया।
- रोगियों द्वारा स्वयं वहन किए जाने वाले औसत व्यय (OOPE) में उल्लेखनीय कमी आई और यह ₹9,451 से घटकर लगभग ₹91 रह गया।
- बड़ी संख्या में रोगियों को यात्रा करने की आवश्यकता नहीं पड़ी, जिसके कारण उनका यात्रा व्यय शून्य हो गया।
स्रोत: PIB
भारत प्राइवेट लॉन्च क्षमता वाला तीसरा देश बना।
पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1 ने सफलतापूर्वक कक्षा में प्रवेश कर लिया है। इसके साथ ही भारत प्राइवेट लॉन्च प्रक्षेपण क्षमता रखने वाला विश्व का तीसरा देश बन गया है।
विक्रम-1 के बारे में
- मिशन आगमन के अंतर्गत विकसित विक्रम-1 एक चार-चरणीय कक्षीय प्रक्षेपण यान है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप स्काईरूट एयरोस्पेस ने विकसित किया है।
- इसके प्रथम तीन चरण ठोस ईंधन आधारित हैं, जो प्रारंभिक चरण में प्रबल प्रणोदन प्रदान करते हैं, जबकि इसका अंतिम चरण हाइपरगोलिक द्रव ईंधन पर आधारित है, जिससे कक्षा में अत्यंत सटीक संचालन संभव हो पाता है।
- इसका निर्माण पूर्णतः कार्बन कंपोजिट संरचना, विश्वसनीय ठोस ईंधन बूस्टर तथा 3D-मुद्रित द्रव इंजन के साथ किया गया है।
- यह भारत का प्रथम निजी क्षेत्र द्वारा विकसित कक्षीय श्रेणी का रॉकेट है।
- विक्रम-1 निम्न पृथ्वी कक्षा में 350 किलोग्राम तथा सूर्य-समकालिक कक्षा में 260 किलोग्राम तक पेलोड स्थापित करने में सक्षम है।
विक्रम-1 द्वारा प्रक्षेपित पेलोड
- रचनात्मकता एवं भारत की वैज्ञानिक विरासत को समर्पित पेलोड:
- कॉस्मिक ब्लूम : कॉसमॉस डायमंड्स द्वारा विकसित, जिसमें एल्यूमिनियम आधार प्लेट पर स्थापित हीरे के आभूषण की विशेष संरचना सम्मिलित है।
- माइक्रोआर्ट : 18 कैरेट स्वर्ण से निर्मित एक सूक्ष्म रॉकेट, जिसमें सर सी. वी. रमन, डॉ. विक्रम साराभाई तथा डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की सूक्ष्म प्रतिमाएँ स्थापित हैं, जिनका आकार चावल के एक दाने से भी छोटा है।
- प्रौद्योगिकी प्रदर्शन पेलोड:
- रोबोटिक आर्म्स — कॉसमोसर्व
- सोलारस — ग्राहा स्पेस
- स्कोप (SCOPE) — स्काईरूट एयरोस्पेस
- अंतरराष्ट्रीय पेलोड — uD3PP एवं mD3RN, जिन्हें जर्मनी की Dcubed GmbH द्वारा विकसित किया गया है।
स्रोत: प्रेस PIB, IT
व्हाइट रैबिट प्रौद्योगिकी आधारित नेटवर्क प्रदर्शन
पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने “एक राष्ट्र, एक समय “ पहल के अंतर्गत बेंगलुरु के जक्कूर स्थित क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशाला में व्हाइट रैबिट प्रौद्योगिकी आधारित भारतीय मानक समय वितरण प्रदर्शन नेटवर्क का उद्घाटन किया।
“एक राष्ट्र, एक समय” पहल क्या है?
- इस पहल का उद्देश्य देश के सभी क्षेत्रों के लिए भारतीय मानक समय का एकल, सटीक, सुरक्षित एवं स्वदेशी स्रोत स्थापित करना है।
- इसका लक्ष्य महत्त्वपूर्ण अवसंरचनाओं को एकरूप एवं अनुरेखणीय समय समकालिकता उपलब्ध कराना है।
- यह समय वितरण के लिए भारत की विदेशी वैश्विक नौवहन उपग्रह प्रणालियों (GNSS), जैसे GPS, पर निर्भरता को कम करेगा।
व्हाइट रैबिट प्रौद्योगिकी क्या है?
- व्हाइट रैबिट (WR) एक ईथरनेट आधारित अत्यधिक सटीक समय समकालिकता प्रौद्योगिकी है, जिसमें निम्नलिखित तकनीकों का समन्वय किया गया है—
- प्रिसीजन टाइम प्रोटोकॉल (PTP, IEEE 1588) — घड़ियों के समकालिकीकरण हेतु।
- सिंक्रोनस ईथरनेट (SyncE) — आवृत्ति समकालिकीकरण हेतु।
- ऑप्टिकल फाइबर संचार — अत्यंत न्यून विलंबता सुनिश्चित करने हेतु।
प्रमुख विशेषताएँ
- एक नैनोसेकंड से भी कम स्तर की समय समकालिकता की सटीकता।
- लंबी दूरी के फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क पर उच्च विश्वसनीयता।
- यह एक ओपन-सोर्स प्रौद्योगिकी है, जिसे मूल रूप से सर्न (CERN) द्वारा कण भौतिकी प्रयोगों के लिए विकसित किया गया था तथा वर्तमान में इसे औद्योगिक एवं राष्ट्रीय समय-निर्धारण) के लिए अनुकूलित किया गया है।
भारतीय मानक समय वितरण नेटवर्क की कार्यप्रणाली
- राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला भारत की आधिकारिक परमाणु घड़ियों का संचालन करती है तथा आधिकारिक भारतीय मानक समय उत्पन्न करती है।
- IST को सुरक्षित व्हाइट रैबिट फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क के माध्यम से प्रसारित किया जाता है।
- यह समय अत्यंत उच्च सटीकता के साथ क्षेत्रीय प्रयोगशालाओं एवं महत्त्वपूर्ण संस्थानों तक पहुँचाया जाता है।
- बैंक, स्टॉक एक्सचेंज, दूरसंचार ऑपरेटर, विद्युत ग्रिड, रक्षा प्रणालियाँ तथा डेटा केंद्र अपनी घड़ियों को आधिकारिक IST के साथ समकालिक करते हैं।
स्रोत: PIB
ASW अल्प-गहराई वाले जल युद्धपोत ‘मालवन’
पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा (Defence)
संदर्भ
- भारतीय नौसेना माहे श्रेणी के पनडुब्बी रोधी अल्प-गहराई वाले जल युद्धपोत ‘मालवन’ को सेवा में शामिल करने जा रही है। यह इस श्रेणी का दूसरा युद्धपोत है।
परिचय
- मालवन का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), कोच्चि द्वारा किया गया है।
- इसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत पहल के अंतर्गत युद्धपोतों की अभिकल्पना , निर्माण एवं प्रणाली एकीकरण में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित करता है।
- माहे श्रेणी के ASW शैलो वाटर क्राफ्ट को विशेष रूप से तटीय एवं अल्प-गहराई वाले समुद्री क्षेत्रों में प्रभावी संचालन हेतु डिज़ाइन किया गया है, जिससे भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता में वृद्धि होगी।
- इन युद्धपोतों को भारतीय नौसेना के पुराने अभय श्रेणी के कार्वेटों के स्थान पर शामिल किया जा रहा है।
प्रमुख विशेषताएँ
- इसमें द्वि-शाफ्ट डीज़ल प्रणोदन प्रणाली लगी है, जो 6 मेगावाट से अधिक शक्ति उत्पन्न करती है।
- इसकी अधिकतम गति 25 नॉट है।
- यह 14 नॉट की गति पर 1,800 समुद्री मील तक की परिचालन क्षमता रखता है।
- इसकी सतत समुद्री परिचालन अवधि लगभग 14 दिन है।

स्रोत: PIB
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